The Psychology of Money in Hindi-पैसे का मनोविज्ञान

आज के ब्लॉग में हम बात करेंगे The Psychology of Money in Hindi के बारे में, पैसा या मुद्रा आज हमारे चारो तरफ है या कहिए हम मुद्राओं से घिरे हुए है वास्तविक हो या आभासी ये कागज, धातु या प्लास्टिक के रूप में आज हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुकी है आज के ब्लॉग में हम जानेंगे विभिन्न मुद्राओं का शाही इतिहास और प्राचीन काल से वर्तमान तक का उनका सुनहरा सफर,

मुद्राओं का इतिहास बहुत ही रोचक और पुराना है प्राचीन काल की यदि बात करे तो ऐतिहासिक दस्तावेजों से प्राप्त जानकारी के आधार पर ये ज्ञात होता है कि इनका इतिहास लगभग 600बी.सी. से भी पुराना है आदिम काल में जब मुद्राएं नही हुआ करती थी तब आम तौर पर वस्तुओ को खरीदने और बेचने के लिए वस्तुओ को ही आपस में बदल लिया जाता था यदि किसी किसान को बर्तन चाहिए होते थे तो वह कुम्हार से बर्तनों को अनाज से बदल लिया करते थे इस चलन को बाटा सिस्टम काहा जाता है बाटा सिस्टम वस्तुओ के अदला-बदली की एक पुरानी प्रथा है जिसके अंतर्गत कोई वस्तु या फिर सेवा किसी अन्य वस्तु या फिर सेवा से बदल लिए जाते थे।

इतिहासकारों के अनुसार बाट्रिग का उल्लेख सर्वप्रथम 6000बी.सी. से भी पूर्व मेसोपोटामिया के कबीलों में मिलता है जो की आज मिडिलिस्ट के रूप में जाना जाता है ये वस्तु विनिमय पद्धति बाद में phoenicians के द्वारा अपना ली गई phoenicians लोग वस्तु के अदला- बदली समुद्र पार सुदूर शहरो में भी किया करते थे। प्राचीन bebilonian लोगो ने भी इस पद्धति को और अधिक विकसित किया और वे लोग वस्तुओ को खाद्यय पदार्थ, चाय पत्ती और मसालों से बदला करते थे। नमक भी उन दिनों इतना किमती था कि रोमन काल में सेनिको को इसे वेतन के रूप में दिया जाता था। एक ओर जहां बाटा सिस्टम रूपयो में बेहद सीधा और आसान था वही दूसरी ओर इसमें कुछ मूलभूत कमियां भी थी क्योंकि ये व्यवहार मूलतः आपसी समझ और विश्वास के आधार पर किया जाता था। अक्सर लोगो को ये पता नही चल पाता था कि बदली जाने वाली वस्तु की वास्तविक स्थिति क्या है? और वह कितनी टिकाऊ है? और वे कई अवसरों पर धोखा खा जाया करते थे।

समय के साथ यह प्रणाली अपना स्वरूप बदलती गई और एक नई प्रणाली ने इसका स्थान ले लिया जिसे हम आज मुद्रा या पैसा कहते है। मुद्रा आज जीवन यापन के लिए एक महत्वपूर्ण वस्तु मानी जाती है जिसके द्वारा हम अपनी दैनिक अवश्यकताओ की पूर्ति और भविष्य की योजनाओं के लिए नियोजन करते है। ऐतिहासिक अभिलेखों के जटिल अनुरेखन के आधार पर ये कहा जाता है कि मुद्राओं का उपयोग 600 साल ई. पू. से होता आ रहा है हाला की ये जानना असंभव है की मुद्राओं का अविष्कार आखिर कब हुआ था?

ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर ऐसा कहा जाता है कि मुद्राओं का उपयोग इतिहास के लिखे जाने के पूर्व से भी होता आ रहा है मिश्र, बेबीलोन, भारत और चीनी सभ्यताओं में मुद्राओं का उल्लेख मिलता है। प्राचीन राजवंश मिट्टी या फिर इसी तरह की कुछ अन्य वस्तुओ से बने टोकंस का उपयोग वस्तुओ के आयात और वेतन के रूप में करते थे जिनका स्थान धीरे-धीरे लकड़ी, हाथी दांत और फिर धातुओं ने लेलिया। जहा एक ओर रोमन कासे से बने सिक्कों का उपयोग किया करते थे वही दूसरी ओर इतिहास में सोने और चांदी से बने सिक्कों के चलन का भी विस्तृत उल्लेख मिलता है।

तेरहवीं शताब्दी में यूरोप में सोने से बने सिक्कों का चलन शुरू हुआ जिसका स्थान बाद में चांदी से बने सिक्कों ने लेलिया स्मान्यतः मुद्रा या करेंसी को पैसे या मनी से जोड़ कर देखा और फिर समझा जाता है दरअसल पैसा या मनी एक संख्या मात्र है जबकि मुद्रा या फिर करेंसी इस संख्या का भौतिक स्वरूप होता है जिसे हम देख और छू सकते है समय-समय पर धातुओ से बने सिक्कों ने अपना स्वरूप और आकार बदला और वे व्यापार की दृष्टि से और भी बेहतर और स्थाई होते गए। मुद्राएं चाहे धातु की हो या फिर कागज की आभासी हो या फिर वास्तविक हम पर इसका प्रभाव बड़ा ही व्यापक और गहरा होता है। और इसने व्यापार और हमारी दैनिक आवश्यकताओं के लेन-देन को आज बड़ा ही सरल और पारदर्शी बना दिया है।

The Psychology of Money in Hindi

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